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श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 7: युधिष्ठिरको धृतराष्ट्रके द्वारा राजनीतिका उपदेश  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  15.7.8 
तत्र मित्रबलं राजन् मौलं चैव विशिष्यते।
श्रेणीबलं भृतं चैव तुल्ये एवेति मे मति:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! इनमें मित्रबल और धनबल सबसे महान हैं। मेरा मानना ​​है कि वर्गबल और सेवकबल एक ही हैं।
 
O King! Among these, the power of friends and the power of wealth are the greatest. I believe that the power of the class and the power of servants are the same. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)