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mahabharat 15.7.5: शत्रु पर आक्रमण करने वाले शास्त्रविषाद राजा को अपनी और शत्रु की त्रिविध शक्तियों पर विचार करना चाहिए ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 15.7: युधिष्ठिरको धृतराष्ट्रके द्वारा राजनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 7: युधिष्ठिरको धृतराष्ट्रके द्वारा राजनीतिका उपदेश  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  15.7.5 
प्रयास्यमानो नृपतिस्त्रिविधां परिचिन्तयेत्।
आत्मनश्चैव शत्रोश्च शक्तिं शास्त्रविशारद:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
शत्रु पर आक्रमण करने वाले शास्त्रविषाद राजा को अपनी और शत्रु की त्रिविध शक्तियों पर विचार करना चाहिए ॥5॥
 
A Shastravishad king who attacks the enemy should carefully consider the threefold powers of his own and the enemy. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)