Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.6.9-10h: भरत! राजा को सदैव धन का बड़ा संग्रह रखना चाहिए। जब वह शीघ्र ही शत्रु पर आक्रमण करने योग्य हो जाए, तो उसे उस समय अपने कर्तव्य के विषय में सावधानीपूर्वक और स्थिर भाव से विचार करना चाहिए। | mahabharat अध्याय 15.6: धृतराष्ट्रद्वारा राजनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्रव्याणां संचयश्चैव कर्तव्य: सुमहांस्तथा।
तदा समर्थो यानाय नचिरेणैव भारत॥ ९॥
तदा सर्वं विधेयं स्यात् स्थाने न स विचारयेत्।
अनुवाद
भरत! राजा को सदैव धन का बड़ा संग्रह रखना चाहिए। जब वह शीघ्र ही शत्रु पर आक्रमण करने योग्य हो जाए, तो उसे उस समय अपने कर्तव्य के विषय में सावधानीपूर्वक और स्थिर भाव से विचार करना चाहिए।
Bharata! The king should always keep a large collection of wealth. When he is soon able to attack the enemy, he should think carefully and steadily about his duty at that time. 9 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥