Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.6.6-7: महाबाहो! पहले बहत्तर महामंत्रियों (बारह) का ज्ञान प्राप्त करके, फिर संधि, युद्ध, वाहन, आसन, द्वैत और आश्रय - इन छह गुणों का आवश्यकतानुसार प्रयोग किया जाता है। कुन्तीपुत्र! जब अपना पक्ष बलवान और शत्रु पक्ष दुर्बल प्रतीत होने लगे, तब तुम्हें शत्रु के विरुद्ध युद्ध करना चाहिए और विरोधी राजा को परास्त करने का प्रयत्न करना चाहिए। 6-7। | mahabharat अध्याय 15.6: धृतराष्ट्रद्वारा राजनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महाबाहो! पहले बहत्तर महामंत्रियों (बारह) का ज्ञान प्राप्त करके, फिर संधि, युद्ध, वाहन, आसन, द्वैत और आश्रय - इन छह गुणों का आवश्यकतानुसार प्रयोग किया जाता है। कुन्तीपुत्र! जब अपना पक्ष बलवान और शत्रु पक्ष दुर्बल प्रतीत होने लगे, तब तुम्हें शत्रु के विरुद्ध युद्ध करना चाहिए और विरोधी राजा को परास्त करने का प्रयत्न करना चाहिए। 6-7।
Mahabaho! First, after acquiring knowledge of the seventy-two chief ministers (twelve), then treaty, war, vehicle, seat, duality and shelter - these six qualities are used as and when required. Kunti's son! When your side seems to be strong and the enemy's side seems to be weak, then you should wage war against the enemy and try to defeat the opposing king. 6-7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥