Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.6.5-6h: युधिष्ठिर! आप इस समूह को भली-भाँति जानते हैं; क्योंकि राज्य की रक्षा के लिए संधि-विग्रह आदि छह उपायों का उचित प्रयोग इन्हीं के अधीन है। कुरुश्रेष्ठ! राजा को अपनी वृद्धि, अवनति और स्थिति के प्रति सदैव सचेत रहना चाहिए। 5 1/2॥ | mahabharat अध्याय 15.6: धृतराष्ट्रद्वारा राजनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अत्र षाड्गुण्यमायत्तं युधिष्ठिर निबोध तत्॥ ५॥
वृद्धिक्षयौ च विज्ञेयाै स्थानं च कुरुसत्तम।
अनुवाद
युधिष्ठिर! आप इस समूह को भली-भाँति जानते हैं; क्योंकि राज्य की रक्षा के लिए संधि-विग्रह आदि छह उपायों का उचित प्रयोग इन्हीं के अधीन है। कुरुश्रेष्ठ! राजा को अपनी वृद्धि, अवनति और स्थिति के प्रति सदैव सचेत रहना चाहिए। 5 1/2॥
Yudhisthira! You know this group well; Because the proper use of six measures for the protection of the state like Sandhi-Vigraha etc. is subject to these. Kurushrestha! The king should always be aware of his growth, decline and condition. 5 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥