श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 6: धृतराष्ट्रद्वारा राजनीतिका उपदेश  »  श्लोक 3-5h
 
 
श्लोक  15.6.3-5h 
तथामात्या जनपदा दुर्गाणि विविधानि च।
बलानि च कुरुश्रेष्ठ भवत्येषां यथेच्छकम्॥ ३॥
ते च द्वादश कौन्तेय राज्ञां वै विषयात्मका:।
मन्त्रिप्रधानाश्च गुणा: षष्टिर्द्वादश च प्रभो॥ ४॥
एतन्मण्डलमित्याहुराचार्या नीतिकोविदा:।
 
 
अनुवाद
कुरुश्रेष्ठ! मंत्री, जनपद (देश), नाना प्रकार के दुर्ग और सेनाएँ - ये शत्रुओं के मुख्य लक्ष्य हैं (अतः इनकी रक्षा के लिए सदैव सावधान रहना चाहिए)। हे प्रभो! कुन्तीपुत्र! उपर्युक्त बारह प्रकार के लोग ही राजाओं के मुख्य विषय हैं। कृषि आदि साठ प्रकार के लोग जो मंत्री के अधीन रहते हैं और उपरोक्त बारह प्रकार के लोग - इन सबका नाम बुद्धिमान विद्वानों ने 'मण्डल' रखा है।
 
Best of the Kurus! Ministers, Janapadas (countries), forts of various kinds and armies - these are the main targets of the enemies (so one should always be cautious to protect them). O Lord! Son of Kunti! The above mentioned twelve types of people are the main subjects of kings. The sixty* qualities of agriculture etc. who are under the control of the minister and the twelve types of people mentioned above - all these have been named 'Mandal' by the wise scholars. 3-4 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)