Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.6.15: जो राजा अपने राज्य की रक्षा करता है, उसे अपने शत्रुओं के साथ भी पूर्वोक्त प्रकार से यत्नपूर्वक व्यवहार करना चाहिए; किन्तु जो राजा अपनी उन्नति की इच्छा रखता है, उसे अपने शरणागत सामंत को कभी नहीं मारना चाहिए ॥15॥ | mahabharat अध्याय 15.6: धृतराष्ट्रद्वारा राजनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कार्यं यत्नेन शत्रूणां स्वराज्यं रक्षता स्वयम्।
न च हिंस्योऽभ्युपगत: सामन्तो वृद्धिमिच्छता॥ १५॥
अनुवाद
जो राजा अपने राज्य की रक्षा करता है, उसे अपने शत्रुओं के साथ भी पूर्वोक्त प्रकार से यत्नपूर्वक व्यवहार करना चाहिए; किन्तु जो राजा अपनी उन्नति की इच्छा रखता है, उसे अपने शरणागत सामंत को कभी नहीं मारना चाहिए ॥15॥
A king who protects his kingdom should diligently treat his enemies in the above manner; But a king desirous of personal growth should never kill a feudal lord who has taken refuge in him. 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥