Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.5.42-43: जनेश्वर! आपके देश में उत्पन्न हुए पुरुषों में जो अपने कार्य में विशेष रूप से कुशल और हितैषी हों, उन्हें उचित जीविका देकर कृपापूर्वक स्वीकार करना चाहिए। विद्वान राजा के लिए उचित है कि वह सद्गुणों की अभिलाषा रखने वाले व्यक्ति के सद्गुणों की वृद्धि के लिए प्रयत्नशील रहे। आपको उनके विषय में कोई चिन्तन नहीं करना चाहिए। वे पर्वत के समान सदैव आपके अटल आधार सिद्ध होंगे।॥42-43॥ | mahabharat अध्याय 15.5: धृतराष्ट्रके द्वारा युधिष्ठिरको राजनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जनेश्वर! आपके देश में उत्पन्न हुए पुरुषों में जो अपने कार्य में विशेष रूप से कुशल और हितैषी हों, उन्हें उचित जीविका देकर कृपापूर्वक स्वीकार करना चाहिए। विद्वान राजा के लिए उचित है कि वह सद्गुणों की अभिलाषा रखने वाले व्यक्ति के सद्गुणों की वृद्धि के लिए प्रयत्नशील रहे। आपको उनके विषय में कोई चिन्तन नहीं करना चाहिए। वे पर्वत के समान सदैव आपके अटल आधार सिद्ध होंगे।॥42-43॥
Janeshwar! Among the men born in your country, those who are particularly skilled and well-wishers in their work should be accepted graciously by giving them suitable livelihood. It is appropriate for a learned king to keep trying to increase the virtues of a person seeking virtues. You should not have any thoughts about them. They will always prove to be your unwavering support like a mountain.'॥ 42-43॥
इति श्रीमहाभारते आश्रमवासिके पर्वणि आश्रमवासपर्वणि धृतराष्ट्रोपदेशे पञ्चमोऽध्याय:॥ ५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्रमवासिकपर्वके अन्तर्गत आश्रमवासपर्वमें धृतराष्ट्रका उपदेशविषयक पाँचवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥