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mahabharat 15.5.37-38h: हे प्रभु! जो लोग राजाओं के दोष ढूँढ़ते हैं, ऐसे विद्रोही शत्रुओं का पता गुप्तचरों द्वारा लगा देना चाहिए और विश्वसनीय व्यक्तियों द्वारा दूर से ही उनका वध कर देना चाहिए। 37 1/2   |   mahabharat अध्याय 15.5: धृतराष्ट्रके द्वारा युधिष्ठिरको राजनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 5: धृतराष्ट्रके द्वारा युधिष्ठिरको राजनीतिका उपदेश  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  15.5.37-38h 
चारैर्विदित्वा शत्रूंश्च ये राज्ञामन्तरैषिण:॥ ३७॥
तानाप्तै: पुरुषैर्दूराद् घातयेथा नराधिप।
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! जो लोग राजाओं के दोष ढूँढ़ते हैं, ऐसे विद्रोही शत्रुओं का पता गुप्तचरों द्वारा लगा देना चाहिए और विश्वसनीय व्यक्तियों द्वारा दूर से ही उनका वध कर देना चाहिए। 37 1/2
 
O Lord! Those who look for the faults of kings, such rebellious enemies should be traced by spies and should be killed from a distance by trustworthy people. 37 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)