Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.5.24-25h: जब राजाओं की गुप्त बातें दूसरों पर प्रकट हो जाती हैं, तब उन्हें जो संकटों का सामना करना पड़ता है, उनका समाधान किसी भी प्रकार से नहीं हो सकता - ऐसा मेरा विश्वास है ॥24 1/2॥ | mahabharat अध्याय 15.5: धृतराष्ट्रके द्वारा युधिष्ठिरको राजनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मन्त्रभेदे हि ये दोषा भवन्ति पृथिवीक्षिताम्॥ २४॥
न ते शक्या: समाधातुं कथंचिदिति मे मति:।
अनुवाद
जब राजाओं की गुप्त बातें दूसरों पर प्रकट हो जाती हैं, तब उन्हें जो संकटों का सामना करना पड़ता है, उनका समाधान किसी भी प्रकार से नहीं हो सकता - ऐसा मेरा विश्वास है ॥24 1/2॥
The problems that kings face when their secret consultations are revealed to others cannot be solved by any means - this is my belief. ॥ 24 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥