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mahabharat 15.5.24-25h: जब राजाओं की गुप्त बातें दूसरों पर प्रकट हो जाती हैं, तब उन्हें जो संकटों का सामना करना पड़ता है, उनका समाधान किसी भी प्रकार से नहीं हो सकता - ऐसा मेरा विश्वास है ॥24 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 15.5: धृतराष्ट्रके द्वारा युधिष्ठिरको राजनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 5: धृतराष्ट्रके द्वारा युधिष्ठिरको राजनीतिका उपदेश  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  15.5.24-25h 
मन्त्रभेदे हि ये दोषा भवन्ति पृथिवीक्षिताम्॥ २४॥
न ते शक्या: समाधातुं कथंचिदिति मे मति:।
 
 
अनुवाद
जब राजाओं की गुप्त बातें दूसरों पर प्रकट हो जाती हैं, तब उन्हें जो संकटों का सामना करना पड़ता है, उनका समाधान किसी भी प्रकार से नहीं हो सकता - ऐसा मेरा विश्वास है ॥24 1/2॥
 
The problems that kings face when their secret consultations are revealed to others cannot be solved by any means - this is my belief. ॥ 24 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)