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mahabharat 15.5.23-24h: 'जंगल में जहाँ घास या झाड़ियाँ न हों, वहाँ गुप्त मंत्रणा की जा सकती है; परन्तु ऐसे स्थानों में रात्रि में गुप्त मंत्रणा नहीं करनी चाहिए। मनुष्यों के पीछे चलने वाले बंदरों और पक्षियों को, तथा मूर्ख और अपंग मनुष्यों को मंत्रणा-कक्ष में प्रवेश नहीं देना चाहिए।॥23 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 15.5: धृतराष्ट्रके द्वारा युधिष्ठिरको राजनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 5: धृतराष्ट्रके द्वारा युधिष्ठिरको राजनीतिका उपदेश  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  15.5.23-24h 
अरण्ये नि:शलाके वा न च रात्रौ कथंचन।
वानरा: पक्षिणश्चैव ये मनुष्यानुसारिण:॥ २३॥
सर्वे मन्त्रगृहे वर्ज्या ये चापि जडपङ्गव:।
 
 
अनुवाद
'जंगल में जहाँ घास या झाड़ियाँ न हों, वहाँ गुप्त मंत्रणा की जा सकती है; परन्तु ऐसे स्थानों में रात्रि में गुप्त मंत्रणा नहीं करनी चाहिए। मनुष्यों के पीछे चलने वाले बंदरों और पक्षियों को, तथा मूर्ख और अपंग मनुष्यों को मंत्रणा-कक्ष में प्रवेश नहीं देना चाहिए।॥23 1/2॥
 
‘Secret consultations can be held in forests where there is not much grass or bushes; however, secret consultations should not be held at night in these places. Monkeys and birds that follow humans, as well as foolish and crippled humans should not be allowed to enter the consultation room.॥ 23 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)