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mahabharat 15.5.13: जैसे सारथी घोड़ों को वश में रखता है, वैसे ही तुम भी अपनी समस्त इन्द्रियों को वश में रखकर उनकी रक्षा करो। ऐसा करने से भविष्य में इन्द्रियाँ सुरक्षित धन के समान तुम्हारे लिए अवश्य ही लाभदायक होंगी॥13॥   |   mahabharat अध्याय 15.5: धृतराष्ट्रके द्वारा युधिष्ठिरको राजनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 5: धृतराष्ट्रके द्वारा युधिष्ठिरको राजनीतिका उपदेश  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  15.5.13 
इन्द्रियाणि च सर्वाणि वाजिवत् परिपालय।
हितायैव भविष्यन्ति रक्षितं द्रविणं यथा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जैसे सारथी घोड़ों को वश में रखता है, वैसे ही तुम भी अपनी समस्त इन्द्रियों को वश में रखकर उनकी रक्षा करो। ऐसा करने से भविष्य में इन्द्रियाँ सुरक्षित धन के समान तुम्हारे लिए अवश्य ही लाभदायक होंगी॥13॥
 
‘Just as a charioteer controls horses, similarly you should keep all your senses under your control and protect them. By doing so, the senses will definitely be beneficial to you in the future like safe wealth.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)