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mahabharat 15.5.12: राजा! तात! भरतनन्दन! जब वे आपके द्वारा अपना सर्वश्रेष्ठ करने की इच्छा से सम्मानित होते हैं, तब वे सदैव आपके हित की ही बात कहेंगे। 12॥   |   mahabharat अध्याय 15.5: धृतराष्ट्रके द्वारा युधिष्ठिरको राजनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  15.5.12 
ते तु सम्मानिता राजंस्त्वया कार्यहितार्थिना।
प्रवक्ष्यन्ति हितं तात सर्वथा तव भारत॥ १२॥
 
 
अनुवाद
राजा! तात! भरतनन्दन! जब वे आपके द्वारा अपना सर्वश्रेष्ठ करने की इच्छा से सम्मानित होते हैं, तब वे सदैव आपके हित की ही बात कहेंगे। 12॥
 
King! Tat! Bharatnandan! When they are honored by you with a desire to do their best, they will always tell you only what is in your best interest. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)