Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.4.20-21: ‘पिताजी! भगवान व्यासजी ने जो आज्ञा दी है, आपने जो निश्चय किया है, तथा महाधनुर्धर कृपाचार्य, विदुर, युयुत्सु और संजय जो कहेंगे, मैं निःसंदेह वही करूँगा; क्योंकि ये सब लोग इस कुल के हितैषी होने के कारण मेरे लिए आदरणीय हैं॥ 20-21॥ | mahabharat अध्याय 15.4: व्यासजीके समझानेसे युधिष्ठिरका धृतराष्ट्रको वनमें जानेके लिये अनुमति देना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदाह भगवान् व्यासो यच्चापि भवतो मतम्।
यथाऽऽह च महेष्वास: कृपो विदुर एव च॥ २०॥
युयुत्सु: संजयश्चैव तत्कर्तास्म्यहमञ्जसा।
सर्व एव हि मान्या मे कुलस्य हि हितैषिण:॥ २१॥
अनुवाद
‘पिताजी! भगवान व्यासजी ने जो आज्ञा दी है, आपने जो निश्चय किया है, तथा महाधनुर्धर कृपाचार्य, विदुर, युयुत्सु और संजय जो कहेंगे, मैं निःसंदेह वही करूँगा; क्योंकि ये सब लोग इस कुल के हितैषी होने के कारण मेरे लिए आदरणीय हैं॥ 20-21॥
‘Father! Whatever Lord Vyasa has commanded, whatever you have decided to do, and whatever the great archer Kripacharya, Vidura, Yuyutsu and Sanjaya say, I will undoubtedly do the same; because all these people are respected by me because they are well-wishers of this clan.॥ 20-21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥