Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.4.15: जब आप वन में चले गए थे, तो तेरह वर्षों तक उन्होंने अपने पुत्र के अधीन विशाल राज्य का आनंद लिया और अनेक प्रकार की सम्पत्ति दान की। | mahabharat अध्याय 15.4: व्यासजीके समझानेसे युधिष्ठिरका धृतराष्ट्रको वनमें जानेके लिये अनुमति देना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुत्रसंस्थं च विपुलं राज्यं विप्रोषिते त्वयि।
त्रयोदशसमा भुक्तं दत्तं च विविधं वसु॥ १५॥
अनुवाद
जब आप वन में चले गए थे, तो तेरह वर्षों तक उन्होंने अपने पुत्र के अधीन विशाल राज्य का आनंद लिया और अनेक प्रकार की सम्पत्ति दान की।
When you had gone to the forest, for thirteen years he enjoyed the vast kingdom that was under the rule of his son and gave away various kinds of wealth.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥