श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 39: राजा युधिष्ठिरद्वारा धृतराष्ट्र, गान्धारी और कुन्ती—इन तीनोंकी हड्डियोंको गङ्गामें प्रवाहित कराना तथा श्राद्धकर्म करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  15.39.8 
गुरुशुश्रूषया चैव जननी ते जनाधिप।
प्राप्ता सुमहतीं सिद्धिमिति मे नात्र संशय:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे जनेश्वर! मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि आपकी माता कुन्तीदेवी ने अपने बड़ों की सेवा के फलस्वरूप महान सिद्धि प्राप्त की है॥8॥
 
O Janeshwar! I have no doubt that your mother Kuntidevi has attained great siddhi (attainment) as a result of serving her elders. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)