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mahabharat 15.39.27: राजा युधिष्ठिर, जिनके सगे-संबंधी नष्ट हो गए थे, हृदय से दुखी थे और किसी तरह राज्य का कामकाज चलाने लगे।   |   mahabharat अध्याय 15.39: राजा युधिष्ठिरद्वारा धृतराष्ट्र, गान्धारी और कुन्ती—इन तीनोंकी हड्डियोंको गङ्गामें प्रवाहित कराना तथा श्राद्धकर्म करना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 39: राजा युधिष्ठिरद्वारा धृतराष्ट्र, गान्धारी और कुन्ती—इन तीनोंकी हड्डियोंको गङ्गामें प्रवाहित कराना तथा श्राद्धकर्म करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  15.39.27 
युधिष्ठिरस्तु नृपतिर्नातिप्रीतमनास्तदा।
धारयामास तद् राज्यं निहतज्ञातिबान्धव:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
राजा युधिष्ठिर, जिनके सगे-संबंधी नष्ट हो गए थे, हृदय से दुखी थे और किसी तरह राज्य का कामकाज चलाने लगे।
 
King Yudhishthira, whose relatives had been destroyed, was unhappy at heart and somehow began to manage the affairs of the kingdom.
 
इति श्रीमहाभारते आश्रमवासिके पर्वणि नारदागमनपर्वणि श्राद्धदाने एकोनचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ३९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्रमवासिकपर्वके अन्तर्गत नारदागमनपर्वमें श्राद्धदानविषयक उनतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३९॥

॥ आश्रमवासिकपर्व सम्पूर्ण॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)