श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 39: राजा युधिष्ठिरद्वारा धृतराष्ट्र, गान्धारी और कुन्ती—इन तीनोंकी हड्डियोंको गङ्गामें प्रवाहित कराना तथा श्राद्धकर्म करना  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  15.39.17-18 
धृतराष्ट्रं समुद्दिश्य ददौ स पृथिवीपति:।
सुवर्णं रजतं गाश्च शय्याश्च सुमहाधना:॥ १७॥
गान्धार्याश्चैव तेजस्वी पृथायाश्च पृथक् पृथक्।
संकीर्त्य नामनी राजा ददौ दानमनुत्तमम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
यशस्वी राजा युधिष्ठिर ने धृतराष्ट्र, गांधारी और कुन्ती को अलग-अलग नाम लेकर स्वर्ण, रजत, गौएं और बहुमूल्य शय्याएं प्रदान कीं तथा उत्तम दान भी दिया।
 
The illustrious King Yudhishthira gave gold, silver, cows and precious beds to Dhritarashtra, Gandhari and Kunti, each by taking their names separately, and also gave the most excellent donation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)