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mahabharat 15.39.1: नारदजी बोले - "हे उत्तम व्रत का पालन करने वाले राजन! विचित्रवीर्य के पुत्र राजा धृतराष्ट्र का दाह-संस्कार (सांसारिक) अग्नि द्वारा व्यर्थ नहीं हुआ। इस विषय में मैंने जो कुछ वहाँ सुना था, वह सब मैं आपसे कहूँगा॥ 1॥   |   mahabharat अध्याय 15.39: राजा युधिष्ठिरद्वारा धृतराष्ट्र, गान्धारी और कुन्ती—इन तीनोंकी हड्डियोंको गङ्गामें प्रवाहित कराना तथा श्राद्धकर्म करना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 39: राजा युधिष्ठिरद्वारा धृतराष्ट्र, गान्धारी और कुन्ती—इन तीनोंकी हड्डियोंको गङ्गामें प्रवाहित कराना तथा श्राद्धकर्म करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  15.39.1 
नारद उवाच
नासौ वृथाग्निना दग्धो यथा तत्र श्रुतं मया।
वैचित्रवीर्यो नृपतिस्तत् ते वक्ष्यामि सुव्रत॥ १॥
 
 
अनुवाद
नारदजी बोले - "हे उत्तम व्रत का पालन करने वाले राजन! विचित्रवीर्य के पुत्र राजा धृतराष्ट्र का दाह-संस्कार (सांसारिक) अग्नि द्वारा व्यर्थ नहीं हुआ। इस विषय में मैंने जो कुछ वहाँ सुना था, वह सब मैं आपसे कहूँगा॥ 1॥
 
Narada said, "O King who observes the best fast! The cremation of King Dhritarashtra, the son of Vichitravirya, was not done in vain by the (worldly) fire. I will tell you everything that I had heard there about this matter.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)