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mahabharat 15.38.9: हे ब्राह्मण! काल की गति अत्यंत सूक्ष्म है, जिसके कारण माता कुंती ने राज्य त्यागकर वन में रहना ही श्रेयस्कर समझा।   |   mahabharat अध्याय 15.38: नारदजीके सम्मुख युधिष्ठिरका धृतराष्ट्र आदिके लौकिक अग्निमें दग्ध हो जानेका वर्णन करते हुए विलाप और अन्य पाण्डवोंका भी रोदन   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 38: नारदजीके सम्मुख युधिष्ठिरका धृतराष्ट्र आदिके लौकिक अग्निमें दग्ध हो जानेका वर्णन करते हुए विलाप और अन्य पाण्डवोंका भी रोदन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  15.38.9 
सुसूक्ष्मा किल कालस्य गतिर्द्विजवरोत्तम।
यत् समुत्सृज्य राज्यं सा वनवासमरोचयत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मण! काल की गति अत्यंत सूक्ष्म है, जिसके कारण माता कुंती ने राज्य त्यागकर वन में रहना ही श्रेयस्कर समझा।
 
O Brahmin! The movement of time is extremely subtle, due to which mother Kunti thought it best to abandon the kingdom and stay in the forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)