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mahabharat 15.38.3: यह कितने दुःख की बात है कि वह शक्तिशाली राजा जिसके सौ पुत्र थे और जो स्वयं दस हजार हाथियों के समान बलवान था, जंगल की आग में जलकर मर गया।   |   mahabharat अध्याय 15.38: नारदजीके सम्मुख युधिष्ठिरका धृतराष्ट्र आदिके लौकिक अग्निमें दग्ध हो जानेका वर्णन करते हुए विलाप और अन्य पाण्डवोंका भी रोदन   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 38: नारदजीके सम्मुख युधिष्ठिरका धृतराष्ट्र आदिके लौकिक अग्निमें दग्ध हो जानेका वर्णन करते हुए विलाप और अन्य पाण्डवोंका भी रोदन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  15.38.3 
यस्य पुत्रशतं श्रीमदभवद् बाहुशालिन:।
नागायुतबलो राजा स दग्धो हि दवाग्निना॥ ३॥
 
 
अनुवाद
यह कितने दुःख की बात है कि वह शक्तिशाली राजा जिसके सौ पुत्र थे और जो स्वयं दस हजार हाथियों के समान बलवान था, जंगल की आग में जलकर मर गया।
 
How sad it is that the mighty king who had a hundred sons and who himself was as strong as ten thousand elephants, has died in a forest fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)