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mahabharat 15.38.20-21: वहाँ उन महान पाण्डवों के रोने की ध्वनि भूमि और आकाश में गूँजने लगी, जो महल के विस्तार से अवरुद्ध हो गई थी।   |   mahabharat अध्याय 15.38: नारदजीके सम्मुख युधिष्ठिरका धृतराष्ट्र आदिके लौकिक अग्निमें दग्ध हो जानेका वर्णन करते हुए विलाप और अन्य पाण्डवोंका भी रोदन   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 38: नारदजीके सम्मुख युधिष्ठिरका धृतराष्ट्र आदिके लौकिक अग्निमें दग्ध हो जानेका वर्णन करते हुए विलाप और अन्य पाण्डवोंका भी रोदन  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  15.38.20-21 
तेषां तु पुरुषेन्द्राणां रुदतां रुदितस्वन:॥ २०॥
प्रासादाभोगसंरुद्धे अन्वरौत्सीत् स रोदसी॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वहाँ उन महान पाण्डवों के रोने की ध्वनि भूमि और आकाश में गूँजने लगी, जो महल के विस्तार से अवरुद्ध हो गई थी।
 
There the sound of the weeping of those great Pandavas began to echo in the ground and sky which were blocked by the expanse of the palace. 20-21.
 
इति श्रीमहाभारते आश्रमवासिके पर्वणि नारदागमनपर्वणि युधिष्ठिरविलापे अष्टात्रिंशोऽध्याय:॥ ३८॥
इसप्रकार श्रीमहाभारत आश्रमवासिकपर्वके अन्तर्गत नारदागमनपर्वमें युधिष्ठिरका विलापविषयक अड़तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)