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दुर्विज्ञेया गतिर्ब्रह्मन् पुरुषाणां मतिर्मम।
यत्र वैचित्रवीर्योऽसौ दग्ध एवं वनाग्निना॥ २॥
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! मेरा विचार है कि मनुष्यों के भाग्य को ठीक-ठीक जानना बहुत कठिन है, जबकि विचित्रवीर्य के पुत्र धृतराष्ट्र को इस प्रकार वन की आग में जलकर मरना पड़ा।
O Brahman! I am of the view that it is very difficult to know the fate of human beings with accuracy, when Vichitravirya's son Dhritarashtra had to die in this manner by being burnt in a forest fire.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥