Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 15.38.17-18h: भीमसेन! मुझे इस भय से बचाओ,' ऐसा कहते हुए मेरी माता चारों ओर चिल्लाती हुई जंगल की आग में जलकर भस्म हो गई होंगी। 17 1/2   |   mahabharat अध्याय 15.38: नारदजीके सम्मुख युधिष्ठिरका धृतराष्ट्र आदिके लौकिक अग्निमें दग्ध हो जानेका वर्णन करते हुए विलाप और अन्य पाण्डवोंका भी रोदन   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 38: नारदजीके सम्मुख युधिष्ठिरका धृतराष्ट्र आदिके लौकिक अग्निमें दग्ध हो जानेका वर्णन करते हुए विलाप और अन्य पाण्डवोंका भी रोदन  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  15.38.17-18h 
भीम पर्याप्नुहि भयादिति चैवाभिवाशती॥ १७॥
समन्तत: परिक्षिप्ता माताभून्मे दवाग्निना।
 
 
अनुवाद
भीमसेन! मुझे इस भय से बचाओ,' ऐसा कहते हुए मेरी माता चारों ओर चिल्लाती हुई जंगल की आग में जलकर भस्म हो गई होंगी। 17 1/2
 
Bhimasena! Save me from this fear,' saying this my mother must have been burnt to ashes in a forest fire while she was screaming all around. 17 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)