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mahabharat 15.37.6: युधिष्ठिर बोले, 'हे प्रभु! गंगा के तट पर रहने वाले लोग मेरे पास आकर कहते हैं कि महामना राजा धृतराष्ट्र इन दिनों बड़ी कठोर तपस्या में लीन हैं।   |   mahabharat अध्याय 15.37: नारदजीसे धृतराष्ट्र आदिके दावानलमें दग्ध हो जानेका हाल जानकर युधिष्ठिर आदिका शोक करना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  15.37.6 
युधिष्ठिर उवाच
वदन्ति पुरुषा मेऽद्य गङ्गातीरनिवासिन:।
धृतराष्ट्रं महात्मानमास्थितं परमं तप:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, 'हे प्रभु! गंगा के तट पर रहने वाले लोग मेरे पास आकर कहते हैं कि महामना राजा धृतराष्ट्र इन दिनों बड़ी कठोर तपस्या में लीन हैं।
 
Yudhishthira said, 'O Lord! People living on the banks of the Ganga come to me and say that the great-hearted King Dhritarashtra is engaged in very rigorous penance these days.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)