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तं च वृद्धं तथा दग्धं हतपुत्रं नराधिपम्।
अन्वशोचन्त ते सर्वे गान्धारीं च तपस्विनीम्॥ ४४॥
अनुवाद
पुत्रहीन वृद्ध राजा धृतराष्ट्र और तपस्विनी गांधारी देवी का इस प्रकार भस्म हो जाना सुनकर सब लोग बार-बार विलाप करने लगे ॥ 44॥
On hearing that the sonless old King Dhritarashtra and the ascetic Gandhari Devi had been burnt in this manner, everyone began to lament repeatedly. ॥ 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥