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श्लोक  15.37.40-41h 
अन्त:पुराणां च तदा महानार्तस्वरोऽभवत्॥ ४०॥
पौराणां च महाराज श्रुत्वा राज्ञस्तदा गतिम्।
 
 
अनुवाद
महाराज! उस समय उनके अन्तःपुर में बड़ी पीड़ा भरी चीख सुनाई दी। राजा की दशा सुनकर नगर के लोग भी भयभीत हो गए।
 
Maharaj! At that time, a great cry of pain was heard in his inner palace. Hearing about the condition of the king, the people of the city also became terrified. 40 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)