न शोचितव्यं राजेन्द्र स्वत: स पृथिवीपति:॥ ३८॥
प्राप्तवानग्निसंयोगं गान्धारी जननी च ते।
अनुवाद
राजा! राजा धृतराष्ट्र, गांधारी और आपकी माता कुन्ती - ये तीनों अग्निपद को प्राप्त हो चुके हैं; अतः आपको उनके लिए शोक नहीं करना चाहिए।
King! King Dhritarashtra, Gandhari and your mother Kunti - all three had themselves attained the state of Agni; therefore you should not mourn for them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥