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mahabharat 15.37.3: हे प्रभु! बहुत दिनों से मैंने आपके दर्शन नहीं किए। ब्रह्म! क्या सब कुशल है? या आपको केवल अच्छी वस्तुएँ ही प्राप्त होती हैं?॥3॥   |   mahabharat अध्याय 15.37: नारदजीसे धृतराष्ट्र आदिके दावानलमें दग्ध हो जानेका हाल जानकर युधिष्ठिर आदिका शोक करना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  15.37.3 
चिरात्तु नानुपश्यामि भगवन्तमुपस्थितम्।
कच्चित् ते कुशलं विप्र शुभं वा प्रत्युपस्थितम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! बहुत दिनों से मैंने आपके दर्शन नहीं किए। ब्रह्म! क्या सब कुशल है? या आपको केवल अच्छी वस्तुएँ ही प्राप्त होती हैं?॥3॥
 
Lord! I have not seen your presence here for a long time. Brahman! Is everything fine? Or do you only get good things?॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)