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mahabharat 15.37.21-22h: राजन! सारा वन आग की चपेट में आ गया और उन लोगों पर बड़ी विपत्ति आ पड़ी। राजा धृतराष्ट्र वहाँ से भागने में असमर्थ थे क्योंकि उपवास के कारण उनकी प्राणशक्ति क्षीण हो गई थी। आपकी दोनों माताएँ भी बहुत दुर्बल हो गई थीं, इसलिए वे भी भागने में असमर्थ थीं।   |   mahabharat अध्याय 15.37: नारदजीसे धृतराष्ट्र आदिके दावानलमें दग्ध हो जानेका हाल जानकर युधिष्ठिर आदिका शोक करना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  15.37.21-22h 
समाविद्धे वने तस्मिन् प्राप्ते व्यसन उत्तमे।
निराहारतया राजन् मन्दप्राणविचेष्टित:॥ २१॥
असमर्थोऽपसरणे सुकृशे मातरौ च ते।
 
 
अनुवाद
राजन! सारा वन आग की चपेट में आ गया और उन लोगों पर बड़ी विपत्ति आ पड़ी। राजा धृतराष्ट्र वहाँ से भागने में असमर्थ थे क्योंकि उपवास के कारण उनकी प्राणशक्ति क्षीण हो गई थी। आपकी दोनों माताएँ भी बहुत दुर्बल हो गई थीं, इसलिए वे भी भागने में असमर्थ थीं।
 
King! The entire forest was engulfed in fire and a great calamity befell those people. King Dhritarashtra was unable to escape from there as his life force had been weakened due to fasting. Your two mothers had also become very weak; hence they too were unable to escape. 21/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)