Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 15.37.17: जब भूभाग असमान हो गया, तो संजय ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने राजा धृतराष्ट्र का मार्गदर्शन किया, और निर्विवाद, पवित्र कुंती गांधारी की आंख थीं।   |   mahabharat अध्याय 15.37: नारदजीसे धृतराष्ट्र आदिके दावानलमें दग्ध हो जानेका हाल जानकर युधिष्ठिर आदिका शोक करना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 37: नारदजीसे धृतराष्ट्र आदिके दावानलमें दग्ध हो जानेका हाल जानकर युधिष्ठिर आदिका शोक करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  15.37.17 
संजयो नृपतेर्नेता समेषु विषमेषु च।
गान्धार्याश्च पृथा चैव चक्षुरासीदनिन्दिता॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जब भूभाग असमान हो गया, तो संजय ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने राजा धृतराष्ट्र का मार्गदर्शन किया, और निर्विवाद, पवित्र कुंती गांधारी की आंख थीं।
 
When the terrain became uneven, Sanjaya was the one who guided King Dhritarashtra, and the unquestionable, chaste Kunti was the eye for Gandhari.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)