Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.37.13: उस वन में रहने वाले सभी ऋषिगण उनका बहुत आदर करने लगे। महातपस्वी धृतराष्ट्र का शरीर केवल हड्डियों का ढाँचा मात्र रह गया था, जो चर्म से ढका हुआ था। उन्होंने उसी अवस्था में छह महीने बिताए॥13॥ | mahabharat अध्याय 15.37: नारदजीसे धृतराष्ट्र आदिके दावानलमें दग्ध हो जानेका हाल जानकर युधिष्ठिर आदिका शोक करना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वने स मुनिभि: सर्वै: पूज्यमानो महातपा:।
त्वगस्थिमात्रशेष: स षण्मासानभवन्नृप:॥ १३॥
अनुवाद
उस वन में रहने वाले सभी ऋषिगण उनका बहुत आदर करने लगे। महातपस्वी धृतराष्ट्र का शरीर केवल हड्डियों का ढाँचा मात्र रह गया था, जो चर्म से ढका हुआ था। उन्होंने उसी अवस्था में छह महीने बिताए॥13॥
All the sages who lived in that forest started respecting him a lot. The body of the great ascetic Dhritarashtra was left with only a skeleton of bones covered with skin. He spent six months in that state.॥13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥