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श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 36: व्यासजीकी आज्ञासे धृतराष्ट्र आदिका पाण्डवोंको विदा करना और पाण्डवोंका सदलबल हस्तिनापुरमें आना  »  श्लोक 52-53
 
 
श्लोक  15.36.52-53 
तत: प्रजज्ञे निनद: सूतानां युज्यतामिति॥ ५२॥
उष्ट्राणां क्रोशतां चापि हयानां हेषतामपि।
ततो युधिष्ठिरो राजा सदार: सहसैनिक:।
नगरं हास्तिनपुरं पुनरायात् सबान्धव:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद सारथि चिल्लाने लगे, "रथ जोत दो, रथ जोत दो।" तभी ऊँटों की तुरही और घोड़ों की हिनहिनाहट की ध्वनि सुनाई दी। इसके बाद राजा युधिष्ठिर अपनी स्त्रियों, भाइयों और सैनिकों के साथ हस्तिनापुर लौट आए।
 
Thereafter the charioteers shouted, 'Harness the chariot, harness the chariot'. Then there was the sound of camels trumpeting and horses neighing. After this King Yudhishthira returned to Hastinapur with his women, brothers and soldiers.
 
इति श्रीमहाभारते आश्रमवासिके पर्वणि पुत्रदर्शनपर्वणि युधिष्ठिरप्रत्यागमे षट्‍‍त्रिंशोऽध्याय:॥ ३६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्रमवासिकपर्वके अन्तर्गत पुत्रदर्शनपर्वमें युधिष्ठिरका प्रत्यागमनविषयक छत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३६॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)