Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.36.47-50h: तत्पश्चात धृतराष्ट्र ने अर्जुन और महापुरुष नकुल तथा सहदेव को गले लगाकर विदा किया। इसके बाद पांडवों ने गांधारी के चरणों में प्रणाम किया और उनकी अनुमति ली। फिर माता कुंती ने उन्हें गले लगाया और उनके माथे को सूंघा। जैसे दूध पीने से रोके जाने पर बछड़े अपनी माताओं के चारों ओर चक्कर लगाते हैं और बार-बार उनकी ओर देखते हैं, वैसे ही पांडव राजा के चारों ओर चक्कर लगाते हैं और बार-बार उनकी ओर देखते हैं। | mahabharat अध्याय 15.36: व्यासजीकी आज्ञासे धृतराष्ट्र आदिका पाण्डवोंको विदा करना और पाण्डवोंका सदलबल हस्तिनापुरमें आना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अर्जुनं च समाश्लिष्य यमौ च पुरुषर्षभौ॥ ४७॥
अनुजज्ञे स कौरव्य: परिष्वज्याभिनन्द्य च।
गान्धार्या चाभ्यनुज्ञाता: कृतपादाभिवादना:॥ ४८॥
जनन्या समुपाघ्राता: परिष्वक्ताश्च ते नृपम्।
चक्रु: प्रदक्षिणं सर्वे वत्सा इव निवारणे॥ ४९॥
पुन: पुनर्निरीक्षन्त: प्रचक्रुस्ते प्रदक्षिणम्।
अनुवाद
तत्पश्चात धृतराष्ट्र ने अर्जुन और महापुरुष नकुल तथा सहदेव को गले लगाकर विदा किया। इसके बाद पांडवों ने गांधारी के चरणों में प्रणाम किया और उनकी अनुमति ली। फिर माता कुंती ने उन्हें गले लगाया और उनके माथे को सूंघा। जैसे दूध पीने से रोके जाने पर बछड़े अपनी माताओं के चारों ओर चक्कर लगाते हैं और बार-बार उनकी ओर देखते हैं, वैसे ही पांडव राजा के चारों ओर चक्कर लगाते हैं और बार-बार उनकी ओर देखते हैं।
Thereafter Dhritarashtra embraced Arjuna and the great men Nakula and Sahadeva and said goodbye to them. After this the Pandavas bowed down to the feet of Gandhari and took her permission. Then mother Kunti embraced them and smelt their foreheads. Just as calves circle around their mothers looking at them again and again when they are stopped from drinking milk, in the same way the Pandavas circled around the king looking at them again and again.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥