Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.36.46-47h: तत्पश्चात् राजा धृतराष्ट्र ने बलवानों में श्रेष्ठ भीमसेन को सान्त्वना दी। बुद्धिमान् एवं पराक्रमी भीमसेन ने भी उनकी बातें सत्यतापूर्वक स्वीकार कीं - उन्हें हृदय से स्वीकार किया ॥46 1/2॥ | mahabharat अध्याय 15.36: व्यासजीकी आज्ञासे धृतराष्ट्र आदिका पाण्डवोंको विदा करना और पाण्डवोंका सदलबल हस्तिनापुरमें आना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीमं च बलिनां श्रेष्ठं सान्त्वयामास पार्थिव:॥ ४६॥
स चास्य सम्यङ्मेधावी प्रत्यपद्यत वीर्यवान्।
अनुवाद
तत्पश्चात् राजा धृतराष्ट्र ने बलवानों में श्रेष्ठ भीमसेन को सान्त्वना दी। बुद्धिमान् एवं पराक्रमी भीमसेन ने भी उनकी बातें सत्यतापूर्वक स्वीकार कीं - उन्हें हृदय से स्वीकार किया ॥46 1/2॥
After this, King Dhritarashtra consoled Bhimsen, the best among the strong. The intelligent and mighty Bhimsen also accepted his words truthfully – accepted them wholeheartedly. 46 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥