Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.36.37-39h: भरतश्रेष्ठ! मुझमें अपनी माँ को छोड़कर जाने का साहस नहीं है। प्रभु! आप शीघ्र लौट आइए। मैं यहीं रहकर तपस्या करूँगा और तप से अपने शरीर को सुखाऊँगा। मैं यहीं महाराज और इन दोनों माताओं के चरणों की सेवा में समर्पित रहना चाहता हूँ।' | mahabharat अध्याय 15.36: व्यासजीकी आज्ञासे धृतराष्ट्र आदिका पाण्डवोंको विदा करना और पाण्डवोंका सदलबल हस्तिनापुरमें आना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भरतश्रेष्ठ! मुझमें अपनी माँ को छोड़कर जाने का साहस नहीं है। प्रभु! आप शीघ्र लौट आइए। मैं यहीं रहकर तपस्या करूँगा और तप से अपने शरीर को सुखाऊँगा। मैं यहीं महाराज और इन दोनों माताओं के चरणों की सेवा में समर्पित रहना चाहता हूँ।'
Bhaarat's best! I do not have the courage to leave my mother. Prabhu! You should return soon. I will stay here and do penance and dry my body by penance. I want to remain here devoted to the service of the feet of Maharaj and these two mothers.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥