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mahabharat 15.36.33: 'उनमें से अधिकांश को द्रोणाचार्य ने युद्धभूमि में ही नष्ट कर दिया था। जो कुछ बच गए थे, उन्हें द्रोणपुत्र अश्वत्थामा ने रात्रि में सोते समय मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 15.36: व्यासजीकी आज्ञासे धृतराष्ट्र आदिका पाण्डवोंको विदा करना और पाण्डवोंका सदलबल हस्तिनापुरमें आना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 36: व्यासजीकी आज्ञासे धृतराष्ट्र आदिका पाण्डवोंको विदा करना और पाण्डवोंका सदलबल हस्तिनापुरमें आना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  15.36.33 
सर्वे हि भस्मसान्नीतास्ते द्रोणेन रणाजिरे।
अवशिष्टाश्च निहता द्रोणपुत्रेण वै निशि॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
'उनमें से अधिकांश को द्रोणाचार्य ने युद्धभूमि में ही नष्ट कर दिया था। जो कुछ बच गए थे, उन्हें द्रोणपुत्र अश्वत्थामा ने रात्रि में सोते समय मार डाला।
 
‘Mostly Dronacharya had destroyed all of them in the battlefield. The few who survived were killed by Drona's son Ashwatthama while they were sleeping at night.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)