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mahabharat 15.36.30: 'महारानी माँ ! अब मेरा मन पहले की तरह राजकार्य में नहीं लगता। मुझे सब प्रकार से तपस्या करने की इच्छा होती है ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 15.36: व्यासजीकी आज्ञासे धृतराष्ट्र आदिका पाण्डवोंको विदा करना और पाण्डवोंका सदलबल हस्तिनापुरमें आना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 36: व्यासजीकी आज्ञासे धृतराष्ट्र आदिका पाण्डवोंको विदा करना और पाण्डवोंका सदलबल हस्तिनापुरमें आना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  15.36.30 
ममापि न तथा राज्ञि राज्ये बुद्धिर्यथा पुरा।
तपस्येवानुरक्तं मे मन: सर्वात्मना तथा॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
'महारानी माँ ! अब मेरा मन पहले की तरह राजकार्य में नहीं लगता। मुझे सब प्रकार से तपस्या करने की इच्छा होती है ॥30॥
 
‘Queen mother! Now my mind is not as inclined towards the state affairs as before. I feel like performing austerities in every possible way.॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)