Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.36.29: धर्मचारिणी! मैं तुम्हारी तपस्या में विघ्न नहीं डालना चाहता; क्योंकि तपस्या से बढ़कर कुछ भी नहीं है। (निष्काम भाव से) तपस्या करने से भी परम भगवान की प्राप्ति होती है। 29॥ | mahabharat अध्याय 15.36: व्यासजीकी आज्ञासे धृतराष्ट्र आदिका पाण्डवोंको विदा करना और पाण्डवोंका सदलबल हस्तिनापुरमें आना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न चोत्सहे तपोविघ्नं कर्तुं ते धर्मचारिणि।
तपसो हि परं नास्ति तपसा विन्दते महत्॥ २९॥
अनुवाद
धर्मचारिणी! मैं तुम्हारी तपस्या में विघ्न नहीं डालना चाहता; क्योंकि तपस्या से बढ़कर कुछ भी नहीं है। (निष्काम भाव से) तपस्या करने से भी परम भगवान की प्राप्ति होती है। 29॥
Dharmacharini! I do not want to disturb your penance; Because there is nothing greater than penance. By doing penance (with a selfless spirit) one also attains the supreme God. 29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥