Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 15.36.22: भरत के परम मित्र! प्रभु! आपने राजनीति की बातें बहुत सुनी हैं, इसलिए मुझे आपसे कहने लायक कुछ नहीं सूझता। आपने मेरे लिए बहुत कुछ किया है।   |   mahabharat अध्याय 15.36: व्यासजीकी आज्ञासे धृतराष्ट्र आदिका पाण्डवोंको विदा करना और पाण्डवोंका सदलबल हस्तिनापुरमें आना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 36: व्यासजीकी आज्ञासे धृतराष्ट्र आदिका पाण्डवोंको विदा करना और पाण्डवोंका सदलबल हस्तिनापुरमें आना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  15.36.22 
राजनीति: सुबहुश: श्रुता ते भरतर्षभ।
संदेष्टव्यं न पश्यामि कृतं मे भवता विभो॥ २२॥
 
 
अनुवाद
भरत के परम मित्र! प्रभु! आपने राजनीति की बातें बहुत सुनी हैं, इसलिए मुझे आपसे कहने लायक कुछ नहीं सूझता। आपने मेरे लिए बहुत कुछ किया है।
 
Bharat's best friend! Lord! You have heard politics many times; hence I do not see anything worth conveying to you. You have done a lot for me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)