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mahabharat 15.36.2: वैशम्पायन बोले, "नरेश्वर! मृत पुत्रों को देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ। उन्हें देखकर राजा धृतराष्ट्र का शोक और शोक नष्ट हो गया। फिर वे अपने आश्रम को लौट आये।"   |   mahabharat अध्याय 15.36: व्यासजीकी आज्ञासे धृतराष्ट्र आदिका पाण्डवोंको विदा करना और पाण्डवोंका सदलबल हस्तिनापुरमें आना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 36: व्यासजीकी आज्ञासे धृतराष्ट्र आदिका पाण्डवोंको विदा करना और पाण्डवोंका सदलबल हस्तिनापुरमें आना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  15.36.2 
वैशम्पायन उवाच
तद् दृष्ट्वा महदाश्चर्यं पुत्राणां दर्शनं नृप।
वीतशोक: स राजर्षि: पुनराश्रममागमत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन बोले, "नरेश्वर! मृत पुत्रों को देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ। उन्हें देखकर राजा धृतराष्ट्र का शोक और शोक नष्ट हो गया। फिर वे अपने आश्रम को लौट आये।"
 
Vaishampayana said, "Nareshwar! Seeing the dead sons was a great surprise. Seeing them, King Dhritarashtra's sorrow and grief vanished. He then returned to his ashram.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)