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mahabharat 15.36.13: अतुलनीय एवं यशस्वी व्यासजी की यह बात सुनकर वक्तृत्व-कुशल कुरुराज धृतराष्ट्र ने युधिष्ठिर को बुलाकर यह कहा-॥13॥   |   mahabharat अध्याय 15.36: व्यासजीकी आज्ञासे धृतराष्ट्र आदिका पाण्डवोंको विदा करना और पाण्डवोंका सदलबल हस्तिनापुरमें आना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 36: व्यासजीकी आज्ञासे धृतराष्ट्र आदिका पाण्डवोंको विदा करना और पाण्डवोंका सदलबल हस्तिनापुरमें आना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  15.36.13 
इत्युक्त: कौरवो राजा व्यासेनातुलतेजसा।
युधिष्ठिरमथाहूय वाग्मी वचनमब्रवीत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
अतुलनीय एवं यशस्वी व्यासजी की यह बात सुनकर वक्तृत्व-कुशल कुरुराज धृतराष्ट्र ने युधिष्ठिर को बुलाकर यह कहा-॥13॥
 
Upon hearing the incomparable and illustrious Vyasa say this, the Kuru king Dhritarashtra, skilled in oratory, called Yudhishthira and said this -॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)