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इत्युक्त: कौरवो राजा व्यासेनातुलतेजसा।
युधिष्ठिरमथाहूय वाग्मी वचनमब्रवीत्॥ १३॥
अनुवाद
अतुलनीय एवं यशस्वी व्यासजी की यह बात सुनकर वक्तृत्व-कुशल कुरुराज धृतराष्ट्र ने युधिष्ठिर को बुलाकर यह कहा-॥13॥
Upon hearing the incomparable and illustrious Vyasa say this, the Kuru king Dhritarashtra, skilled in oratory, called Yudhishthira and said this -॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥