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mahabharat 15.36.1: जनमेजय ने पूछा - ब्रह्मन्! राजा धृतराष्ट्र और युधिष्ठिर ने परलोक से आये हुए अपने पुत्रों, पौत्रों और सम्बन्धियों को देखकर क्या किया?॥1॥   |   mahabharat अध्याय 15.36: व्यासजीकी आज्ञासे धृतराष्ट्र आदिका पाण्डवोंको विदा करना और पाण्डवोंका सदलबल हस्तिनापुरमें आना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 36: व्यासजीकी आज्ञासे धृतराष्ट्र आदिका पाण्डवोंको विदा करना और पाण्डवोंका सदलबल हस्तिनापुरमें आना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  15.36.1 
जनमेजय उवाच
दृष्ट्वा पुत्रांस्तथा पौत्रान् सानुबन्धान् जनाधिप:।
धृतराष्ट्र: किमकरोद् राजा चैव युधिष्ठिर:॥ १॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा - ब्रह्मन्! राजा धृतराष्ट्र और युधिष्ठिर ने परलोक से आये हुए अपने पुत्रों, पौत्रों और सम्बन्धियों को देखकर क्या किया?॥1॥
 
Janamejaya asked – Brahman! What did King Dhritarashtra and Yudhishthira do after seeing their sons, grandsons and relatives who had come from the other world? 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)