Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.35.9-d1h: तत्पश्चात् राजा जनमेजय ने प्रसन्न होकर यज्ञान्त के स्नान के समय से पहले ही अपने पिता को स्नान कराया; फिर स्वयं भी स्नान किया। तत्पश्चात् राजा परीक्षित वहाँ से अन्तर्धान हो गए॥9॥ | mahabharat अध्याय 15.35: व्यासजीकी कृपासे जनमेजयको अपने पिताका दर्शन प्राप्त होना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: सोऽवभृथे राजा मुदितो जनमेजय:।
पितरं स्नापयामास स्वयं सस्नौ च पार्थिव:॥ ९॥
(परीक्षिदपि तत्रैव बभूव स तिरोहित:।)
अनुवाद
तत्पश्चात् राजा जनमेजय ने प्रसन्न होकर यज्ञान्त के स्नान के समय से पहले ही अपने पिता को स्नान कराया; फिर स्वयं भी स्नान किया। तत्पश्चात् राजा परीक्षित वहाँ से अन्तर्धान हो गए॥9॥
Thereafter, King Janamejaya became happy and bathed his father before the time of Yagyanta's bath; Then took bath myself. Then King Parikshit disappeared there. 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥