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श्री महाभारत
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पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व
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अध्याय 35: व्यासजीकी कृपासे जनमेजयको अपने पिताका दर्शन प्राप्त होना
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श्लोक 7
श्लोक
15.35.7
ततस्तद्रूपवयसमागतं नृपतिं दिव:।
श्रीमन्तं पितरं राजा ददर्श जनमेजय:॥ ७॥
अनुवाद
भूपाल जनमेजय ने अपने तेजस्वी पिता राजा परीक्षित को, जो स्वर्ग से उसी रूप और अवस्था में आये थे, देखा॥7॥
Bhupal Janmejay saw his brilliant father King Parikshit who had come from heaven in the same form and condition. 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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