Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.35.2-3: उन महाबली राजा धृतराष्ट्र ने भी राजधर्म, ब्रह्मविद्या और बुद्धि का सच्चा निश्चय प्राप्त कर लिया था। महामुनि विदुर ने अपनी तपस्या से सिद्धि प्राप्त की थी; परन्तु धृतराष्ट्र ने तपस्वी व्यास का आश्रय लेकर सिद्धि प्राप्त की थी। 2-3॥ | mahabharat अध्याय 15.35: व्यासजीकी कृपासे जनमेजयको अपने पिताका दर्शन प्राप्त होना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स राजा राजधर्मांश्च ब्रह्मोपनिषदं तथा।
अवाप्तवान्नरश्रेष्ठो बुद्धिनिश्चयमेव च॥ २॥
विदुरश्च महाप्राज्ञो ययौ सिद्धिं तपोबलात्।
धृतराष्ट्र: समासाद्य व्यासं चैव तपस्विनम्॥ ३॥
अनुवाद
उन महाबली राजा धृतराष्ट्र ने भी राजधर्म, ब्रह्मविद्या और बुद्धि का सच्चा निश्चय प्राप्त कर लिया था। महामुनि विदुर ने अपनी तपस्या से सिद्धि प्राप्त की थी; परन्तु धृतराष्ट्र ने तपस्वी व्यास का आश्रय लेकर सिद्धि प्राप्त की थी। 2-3॥
That great king Dhritarashtra had also attained the true determination of royal religion, Brahmavidya and intellect. The great sage Vidur had achieved success through his penance; But Dhritarashtra had achieved success by taking the help of ascetic Vyas. 2-3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥