Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.35.17: सौति कहते हैं:- शौनक! महाब्राह्मण आस्तिक के मुख से यह बात सुनकर राजा जनमेजय ने महर्षि व्यास का बार-बार पूजन और सत्कार किया॥ 17॥ | mahabharat अध्याय 15.35: व्यासजीकी कृपासे जनमेजयको अपने पिताका दर्शन प्राप्त होना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सौतिरुवाच
एतच्छ्रुत्वा द्विजश्रेष्ठात् स राजा जनमेजय:।
पूजयामास तमृषिमनुमान्य पुन: पुन:॥ १७॥
अनुवाद
सौति कहते हैं:- शौनक! महाब्राह्मण आस्तिक के मुख से यह बात सुनकर राजा जनमेजय ने महर्षि व्यास का बार-बार पूजन और सत्कार किया॥ 17॥
Sauti says:- Shaunak! On hearing this from the mouth of the great Brahmin Aastik, King Janamejaya worshipped and honoured the great sage Vyasa again and again.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥