Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.34.8: जब तक शरीर का प्रारब्ध क्षय नहीं होता, तब तक जीव उसी शरीर के साथ एकरूप रहता है। जब कर्मों का नाश हो जाता है, तब वह दूसरा रूप प्राप्त करता है। 8॥ | mahabharat अध्याय 15.34: मरे हुए पुरुषोंका अपने पूर्व शरीरसे ही यहाँ पुन: दर्शन देना कैसे सम्भव है, जनमेजयकी इस शंकाका वैशम्पायनद्वारा समाधान । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब तक शरीर का प्रारब्ध क्षय नहीं होता, तब तक जीव उसी शरीर के साथ एकरूप रहता है। जब कर्मों का नाश हो जाता है, तब वह दूसरा रूप प्राप्त करता है। 8॥
As long as the destiny of the body does not decay, the living being remains identical with that body. When the karmas are destroyed, then it attains another form. 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥