Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.34.6: कर्तापन के अभिमान से रहित होकर, सहज भाव से किए गए कर्म से जो फल प्राप्त होता है, वही सत्य और श्रेष्ठ है, अर्थात् मुक्तिदायक है। कर्तापन और परिश्रम के अभिमान से बंधा हुआ जीवात्मा सुख-दुःख का अनुभव करता है। 6॥ | mahabharat अध्याय 15.34: मरे हुए पुरुषोंका अपने पूर्व शरीरसे ही यहाँ पुन: दर्शन देना कैसे सम्भव है, जनमेजयकी इस शंकाका वैशम्पायनद्वारा समाधान । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कर्तापन के अभिमान से रहित होकर, सहज भाव से किए गए कर्म से जो फल प्राप्त होता है, वही सत्य और श्रेष्ठ है, अर्थात् मुक्तिदायक है। कर्तापन और परिश्रम के अभिमान से बंधा हुआ जीवात्मा सुख-दुःख का अनुभव करता है। 6॥
The result that is obtained from the work done spontaneously, without pride of doing, is true and best, that is, it is liberating. The soul, bound by pride of doing and hard work, experiences happiness and sorrow. 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥