Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.33.6-7h: भारतभूषण! वे सभी योद्धा एक-दूसरे से मिलकर अत्यंत प्रसन्न हुए। इस प्रकार ऋषि की कृपा से वे सभी क्षत्रिय अपना क्रोध भूल गए, वैर-विरोध त्यागकर परस्पर मैत्रीभाव स्थापित करते हुए मिले। | mahabharat अध्याय 15.33: परलोकसे आये हुए व्यक्तियोंका परस्पर राग-द्वेषसे रहित होकर मिलना और रात बीतनेपर अदृश्य हो जाना, व्यासजीकी आज्ञासे विधवा क्षत्राणियोंका गङ्गाजीमें गोता लगाकर अपने-अपने पतिके लोकको प्राप्त करना तथा इस पर्वके श्रवणकी महिमा । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भारतभूषण! वे सभी योद्धा एक-दूसरे से मिलकर अत्यंत प्रसन्न हुए। इस प्रकार ऋषि की कृपा से वे सभी क्षत्रिय अपना क्रोध भूल गए, वैर-विरोध त्यागकर परस्पर मैत्रीभाव स्थापित करते हुए मिले।
Bharatbhushan! All those warriors were very happy to meet each other. Thus, by the grace of the sage, all those Kshatriyas forgot their anger, gave up their enmity and met each other establishing mutual cordiality. 6 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥